Tuesday, 27 August 2019

केंचुआ खाद का महत्व------------------------------

  • यह भूमि की उर्वरकता, वातायनता को तो बढ़ाता ही हैं, साथ ही भूमि की जल सोखने की क्षमता में भी वृद्धि करता हैं।
  • वर्मी कम्पोस्ट वाली भूमि में खरपतवार कम उगते हैं तथा पौधों में रोग कम लगते हैं।
  • पौधों तथा भूमि के बीच आयनों के आदान प्रदान में वृद्धि होती हैं।
  • वर्मी कम्पोस्ट का उपयोग करने वाले खेतों में अलग अलग फसलों के उत्पादन में 25-300% तक की वृद्धि हो सकती हैं।
  • मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ जाती हैं।
  • वर्मी कम्पोस्ट युक्त मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश का अनुपात 5:8:11 होता हैं अतः फसलों को पर्याप्त पोषक तत्व सरलता से उपलब्ध हो जाते हैं।
  • केचुओं के मल में पेरीट्रापिक झिल्ली होती हैं, जो जमीन से धूल कणों को चिपकाकर जमीन का वाष्पीकरण होने से रोकती हैं।
  • केचुओं के शरीर का 85% भाग पानी से बना होता हैं इसलिए सूखे की स्थिति में भी ये अपने शरीर के पानी के कम होने के बावजूद जीवित रह सकते हैं तथा मरने के बाद भूमि को नाइट्रोजन प्रदान करते हैं।
  • वर्मी कम्पोस्ट मिट्टी में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि करता हैं तथा भूमि में जैविक क्रियाओं को निरंतरता प्रदान करता हैं।
  • इसका प्रयोग करने से भूमि उपजाऊ एवं भुरभुरी बनती हैं।
  • यह खेत में दीमक एवं अन्य हानिकारक कीटों को नष्ट कर देता हैं। इससे कीटनाशक की लागत में कमी आती हैं।
  • इसके उपयोग के बाद 2-3 फसलों तक पोषक तत्वों की उपलब्धता बनी रहती हैं।
  • मिट्टी में केचुओं की सक्रियता के कारण पौधों की जड़ों के लिए उचित वातावरण बना रहता हैं, जिससे उनका सही विकास होता हैं।

  • इसके प्रयोग से सिंचाई की लागत में कमी आती हैं।
  • लगातार रासायनिक खादों के प्रयोग से कम होती जा रही मिट्टी की उर्वरकता को इसके उपयोग से बढ़ाया जा सकता हैं।
  • इसके प्रयोग से फल, सब्जी, अनाज की गुणवत्ता में सुधार आता हैं, जिससे किसान को उपज का बेहतर मूल्य मिलता हैं।
  • केंचुए में पाए जाने वाले सूक्ष्मजीव मिट्टी का pH संतुलित करते हैं।
  • उपभोक्ताओं को पौष्टिक भोजन की प्राप्ति होती हैं।
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जैविक खाद क्या है?

जैविक खाद को कार्बनिक खाद भी कहा जाता है। इसमें पशु, पक्षियों के मल-मूत्र या शरीर के अवशेष से या पेड़-पौधों से मिलने वाले पदार्थ आते हैं। इस तरह की खाद का इस्तेमाल करने से मिट्टी में ह्यूमस का निर्माण होता है और मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार आता है।
ये जैविक खाद कई तरह की होती है-
बयान खाद – भारत में इस्तेमाल होने वाली जैविक खादों में सबसे महत्वपूर्ण खाद यही है। इस खाद में मिलने वाले पोषक तत्वों की मात्रा पशुओं के प्रकार, पशुओं की उम्र, चारे और खाद को रखने के तरीके पर निर्भर करती है।
कम्पोस्ट खाद – इसे मित्र खाद भी कहते हैं। इस तरह की खाद पेड़- पौधों की पत्तियों, जड़ों और किसी तरह के अवशेष या मल, कूड़ा-कचरा जैसी बेकार चीज़ों को खाद के ढ़ेर में रखकर सड़ाने गलाने से बनती है। इस क्रिया से पौधों के लिए पोषक तत्व ग्रहण करना आसान हो जाता है।
कम्पोस्ट खाद तैयार करते समय इतनी गर्मी पैदा हो जाती है कि मल-मूत्र और कूड़े कचरे में पाए जाने वाले हानिकारक रोगाणु नष्ट हो जाते हैं और बिना गंध वाली उत्तम खाद तैयार हो जाती है।
हरी खाद – हरी खाद बनाने के लिए हरे फलीदार पौधों को उसी खेत में उगाकर या किसी दूसरे स्थान से लाकर जुताई करके मिट्टी में दबा दिया जाता है। इस तरह की खाद से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। हरी खाद का इस्तेमाल करके ही लवणीय और क्षारीय मिट्टियों में सुधार किया जा सकता है।
उम्मीद है जागरूक पर जैविक खाद क्या है कि ये जानकारी आपको पसंद आयी होगी और आपके लिए फायदेमंद भी साबित होगी।
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Saturday, 25 July 2015

'''''''''''''''' अपने आखरी हज के समय अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) का आखरी खुतबा'''''''''''''''''

क्या आप जानते हैं की अपने आखरी हज के समय अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) ने जो आखरी भाषण (खुतबा) दिया जो अपने
आप में एक ऐसी मिसाल है कि किसी भी धर्मगुरु या नेता ने
ऐसा भाषण न दिया होगा जो की मानवता और समानता के उपदेश से परिपूर्ण है|
मेरा सभी मुस्लिम और गैर-मुस्लिम भाइयों से निवेदन है की इसे ज़रूर पढ़ें:
हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:
=>प्यारे भाइयो! मैं जो कुछ कहूँ, ध्यान से सुनो।
ऐ इंसानो!
=> तुम्हारा रब सिर्फ एक अल्लाह है, अल्लाह के साथ किसीको शरीक न करना।
=> अल्लाह की किताब और उसके रसूल की सुन्नत को मजबूती से पकड़े रहना।
=> लोगों की जान-माल और इज़्ज़त का ख़याल रखना,
=> ना तुम लोगो पर ज़ुल्म करो, ना क़यामत में तुम्हारे साथ ज़ुल्म किया जायगा.
=> कोई अमानत रखे तो उसमें ख़यानत न करना।
=> ब्याज के क़रीब भी न फटकना।
=> किसी अरबी किसी अजमी (ग़ैर अरबी) पर कोई बड़ाई नहीं, न किसी अजमी को किसी अरबी पर,
न गोरे को काले पर, न काले को गोरे पर,
प्रमुखता अगर किसी को है तो सिर्फ तक़वा(धर्मपरायणता) व परहेज़गारी से है
अर्थात् रंग, जाति, नस्ल, देश, क्षेत्र किसी की श्रेष्ठता का आधार नहीं है।
=> बड़ाई का आधार अगर कोई है तो ईमान और चरित्र है।
=> तुम्हारे ग़ुलाम, जो कुछ ख़ुद खाओ, वही उनको खिलाओ और जो ख़ुद पहनो, वही उनको पहनाओ।
=>अज्ञानता के तमाम विधान और नियम मेरे पाँव के नीचे हैं।
=> इस्लाम आने से पहले के तमाम ख़ून खत्म कर दिए गए।
(अब किसी को किसी से पुराने ख़ून का बदला लेने का हक़ नहीं) और सबसे पहले मैं अपने
ख़ानदान का ख़ून–रबीआ इब्न हारिस का ख़ून– ख़त्म करता हूँ (यानि उनके कातिलों को क्षमा करता हूँ)|
=>अज्ञानकाल के सभी ब्याज ख़त्म किए जाते हैं और सबसे पहले मैं अपने ख़ानदान में से अब्बास इब्न मुत्तलिब का ब्याज ख़त्म करता हूँ।
=>औरतों के मामले में अल्लाह से डरो।
तुम्हारा औरतों पर और औरतों का तुम पर अधिकार है।
औरतों के मामले में मैं तुम्हें वसीयत करता हूँ कि उनके साथ भलाई का रवैया अपनाओ।
=>ऐ लोगों
याद रखो, मेरे बाद कोई
नबी (ईश्वर का सन्देश वाहक)नहीं और तुम्हारे बाद कोई उम्मत (समुदाय) नहीं।
अत: अपने रब की इबादत करना,
प्रतिदिन पाँचों वक़्त की नमाज़ पढ़ना।
रमज़ान के रोज़े रखना,
खुशी-खुशी अपने माल की ज़कात (2.5% of your accumulated wealth) देना,
अपने पालनहार के घर का हज करना और अपने हाकिमों का आज्ञापालन करना।
=>ऐसा करोगे तो अपने रब की जन्नत में दाख़िल होगे।
ऐ लोगो!
क्या मैंने अल्लाहसका पैग़ाम तुम तक पहुँचा दिया!
लोगों की भारी भीड़ एक साथ बोल उठी :–
हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल!
(तब हजरत मुहम्मद स. ने तीन बार कहा)
ऐ अल्लाह, तू गवाह रहना
(उसके बाद क़ुरआन की यह आखिरी आयत उतरी)
=>"आज मैंने तुम्हारे लिए दीन (सत्य धर्म) को पूरा कर दिया और तुम पर अपनी नेमत

,नबीयों के पेशे

किसी भी नबी ऐ इकराम ने कभी कोई हराम की कमाई नहीं खाई ,,ना कमाई की ,,यानी किसी भी नबी ऐ इकराम ने मोलवी मुल्लाओं की तरह क़ुरआन की आयतो का मोल किया ,,ना ही इबादत ,,,नमाज़ पढ़ाने को अपनी रोज़ी रोटी बनाया ,,,,खुद ने महनत कर हलाल की कमाई खाई तो समझ गए ना जो लोग क़ुरआन की आयतो का मोल करते है वोह किसी कमाई खाते है और जब इनके पेट में रिज़क़ ही हलाल नहीं होगा तो क्या इनके पीछे हमारी इबादत जायज़ है ,,नहीं ना तो फिर चलाइये मुहीम भाई ऐसे मोलवी मुल्लाओं के खिलाफ जो क़ुरआन मजीद ,,की हिदायतों और हदीस की रिवायतों के खिलाफ हलाल की कमाई नहीं कर रहे है और हराम की कमाई से पेट भरकर मुस्लिम भाइयो को गुमराह कर उनका भी ईमान खराब कर रहे है ,,,,,,,,,,,,,,,,,नबीयों के पेशे
हजरत आदम अलैहिसलाम -- खेती
हजरत नूह अलैहिसलाम -- सुतार
हजरत दाऊद अलैहिसलाम -- लोहार
हजरत इद्रीस अलैहिसलाम -- दर्जी
हजरत युसूफ अलैहिसलाम -- तिजारत व
बादशाही
हजरत याकूब अलैहिसलाम --
बकरिया चराना
हजरत इस्माईल अलैहिसलाम -- तीर
बनाना
हजरत सुलेमान अलैहिसलाम --
टोकरिया बनाना
हजरत इसा अलैहिसलाम -- रंग बनाना
हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु
अलैहि वसल्लम -- तिजारत और
बकरियाँ चराना |
हमारे तमाम अंबाया किराम और बड़े बड़े
औलिया जिंदगी गुजारने के लिये मेहनत करके
हलाल रोजी कमाते थे |
मगर किसी के सामने इन्होंने हाथ
नहीं फैलाया |
किसीने कपड़ा बुना, किसीने अनाज
उगाया तो किसी ने टोकरियाँ बनाने
का काम किया |
फिर हममें कौन है जो इनसे बड़ा और
इज्जतवाला हैं ?
मगर हम बदनसीब आज इन पेशों और
हुनरों को नाम रखते हैं और बुरी नजर से देखते हैं
|
और नाजायज और हराम तरीके से
तिजारतकरने में अपना बड़प्पन मानते हैं |
आओ सब मिलकर अल्लाह तआला से
यहीं दुआ करे के हमे
सही तरीके से हलाल
कमाई करने के नेक हिदायत दें

Saturday, 11 August 2012

Dosti nazaro se ho to use kudarat kahate hai,
Sitaro se ho to use zannat kahate hai,
Husan se ho to use mohabbat kahate hai,
Aur dosti aapse ho to use kismat kahate hai…