Saturday, 25 July 2015

'''''''''''''''' अपने आखरी हज के समय अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) का आखरी खुतबा'''''''''''''''''

क्या आप जानते हैं की अपने आखरी हज के समय अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) ने जो आखरी भाषण (खुतबा) दिया जो अपने
आप में एक ऐसी मिसाल है कि किसी भी धर्मगुरु या नेता ने
ऐसा भाषण न दिया होगा जो की मानवता और समानता के उपदेश से परिपूर्ण है|
मेरा सभी मुस्लिम और गैर-मुस्लिम भाइयों से निवेदन है की इसे ज़रूर पढ़ें:
हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया:
=>प्यारे भाइयो! मैं जो कुछ कहूँ, ध्यान से सुनो।
ऐ इंसानो!
=> तुम्हारा रब सिर्फ एक अल्लाह है, अल्लाह के साथ किसीको शरीक न करना।
=> अल्लाह की किताब और उसके रसूल की सुन्नत को मजबूती से पकड़े रहना।
=> लोगों की जान-माल और इज़्ज़त का ख़याल रखना,
=> ना तुम लोगो पर ज़ुल्म करो, ना क़यामत में तुम्हारे साथ ज़ुल्म किया जायगा.
=> कोई अमानत रखे तो उसमें ख़यानत न करना।
=> ब्याज के क़रीब भी न फटकना।
=> किसी अरबी किसी अजमी (ग़ैर अरबी) पर कोई बड़ाई नहीं, न किसी अजमी को किसी अरबी पर,
न गोरे को काले पर, न काले को गोरे पर,
प्रमुखता अगर किसी को है तो सिर्फ तक़वा(धर्मपरायणता) व परहेज़गारी से है
अर्थात् रंग, जाति, नस्ल, देश, क्षेत्र किसी की श्रेष्ठता का आधार नहीं है।
=> बड़ाई का आधार अगर कोई है तो ईमान और चरित्र है।
=> तुम्हारे ग़ुलाम, जो कुछ ख़ुद खाओ, वही उनको खिलाओ और जो ख़ुद पहनो, वही उनको पहनाओ।
=>अज्ञानता के तमाम विधान और नियम मेरे पाँव के नीचे हैं।
=> इस्लाम आने से पहले के तमाम ख़ून खत्म कर दिए गए।
(अब किसी को किसी से पुराने ख़ून का बदला लेने का हक़ नहीं) और सबसे पहले मैं अपने
ख़ानदान का ख़ून–रबीआ इब्न हारिस का ख़ून– ख़त्म करता हूँ (यानि उनके कातिलों को क्षमा करता हूँ)|
=>अज्ञानकाल के सभी ब्याज ख़त्म किए जाते हैं और सबसे पहले मैं अपने ख़ानदान में से अब्बास इब्न मुत्तलिब का ब्याज ख़त्म करता हूँ।
=>औरतों के मामले में अल्लाह से डरो।
तुम्हारा औरतों पर और औरतों का तुम पर अधिकार है।
औरतों के मामले में मैं तुम्हें वसीयत करता हूँ कि उनके साथ भलाई का रवैया अपनाओ।
=>ऐ लोगों
याद रखो, मेरे बाद कोई
नबी (ईश्वर का सन्देश वाहक)नहीं और तुम्हारे बाद कोई उम्मत (समुदाय) नहीं।
अत: अपने रब की इबादत करना,
प्रतिदिन पाँचों वक़्त की नमाज़ पढ़ना।
रमज़ान के रोज़े रखना,
खुशी-खुशी अपने माल की ज़कात (2.5% of your accumulated wealth) देना,
अपने पालनहार के घर का हज करना और अपने हाकिमों का आज्ञापालन करना।
=>ऐसा करोगे तो अपने रब की जन्नत में दाख़िल होगे।
ऐ लोगो!
क्या मैंने अल्लाहसका पैग़ाम तुम तक पहुँचा दिया!
लोगों की भारी भीड़ एक साथ बोल उठी :–
हाँ, ऐ अल्लाह के रसूल!
(तब हजरत मुहम्मद स. ने तीन बार कहा)
ऐ अल्लाह, तू गवाह रहना
(उसके बाद क़ुरआन की यह आखिरी आयत उतरी)
=>"आज मैंने तुम्हारे लिए दीन (सत्य धर्म) को पूरा कर दिया और तुम पर अपनी नेमत

,नबीयों के पेशे

किसी भी नबी ऐ इकराम ने कभी कोई हराम की कमाई नहीं खाई ,,ना कमाई की ,,यानी किसी भी नबी ऐ इकराम ने मोलवी मुल्लाओं की तरह क़ुरआन की आयतो का मोल किया ,,ना ही इबादत ,,,नमाज़ पढ़ाने को अपनी रोज़ी रोटी बनाया ,,,,खुद ने महनत कर हलाल की कमाई खाई तो समझ गए ना जो लोग क़ुरआन की आयतो का मोल करते है वोह किसी कमाई खाते है और जब इनके पेट में रिज़क़ ही हलाल नहीं होगा तो क्या इनके पीछे हमारी इबादत जायज़ है ,,नहीं ना तो फिर चलाइये मुहीम भाई ऐसे मोलवी मुल्लाओं के खिलाफ जो क़ुरआन मजीद ,,की हिदायतों और हदीस की रिवायतों के खिलाफ हलाल की कमाई नहीं कर रहे है और हराम की कमाई से पेट भरकर मुस्लिम भाइयो को गुमराह कर उनका भी ईमान खराब कर रहे है ,,,,,,,,,,,,,,,,,नबीयों के पेशे
हजरत आदम अलैहिसलाम -- खेती
हजरत नूह अलैहिसलाम -- सुतार
हजरत दाऊद अलैहिसलाम -- लोहार
हजरत इद्रीस अलैहिसलाम -- दर्जी
हजरत युसूफ अलैहिसलाम -- तिजारत व
बादशाही
हजरत याकूब अलैहिसलाम --
बकरिया चराना
हजरत इस्माईल अलैहिसलाम -- तीर
बनाना
हजरत सुलेमान अलैहिसलाम --
टोकरिया बनाना
हजरत इसा अलैहिसलाम -- रंग बनाना
हजरत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु
अलैहि वसल्लम -- तिजारत और
बकरियाँ चराना |
हमारे तमाम अंबाया किराम और बड़े बड़े
औलिया जिंदगी गुजारने के लिये मेहनत करके
हलाल रोजी कमाते थे |
मगर किसी के सामने इन्होंने हाथ
नहीं फैलाया |
किसीने कपड़ा बुना, किसीने अनाज
उगाया तो किसी ने टोकरियाँ बनाने
का काम किया |
फिर हममें कौन है जो इनसे बड़ा और
इज्जतवाला हैं ?
मगर हम बदनसीब आज इन पेशों और
हुनरों को नाम रखते हैं और बुरी नजर से देखते हैं
|
और नाजायज और हराम तरीके से
तिजारतकरने में अपना बड़प्पन मानते हैं |
आओ सब मिलकर अल्लाह तआला से
यहीं दुआ करे के हमे
सही तरीके से हलाल
कमाई करने के नेक हिदायत दें