उसने कहा तू चोर है, तुम्हारे मंत्रियों ने घोटाले किये और वो भ्रष्ट हैं, इसने जवाब दिया कर्णाटक में तेरा मुख्य मंत्री चोर और भ्रष्ट है उसकी बात करो. इस ने कहा मोदी ने दंगों में जान बूझ कर लोगों को मरने छोड़ दिया , उसने जवाब दिया तुमने भी तो चोरासी के दंगों में सिक्खों को जान बूझ कर दंगाइयों के हाथो मरने दिया. उसने कहा विकिलीक में तुम्हारे वोट के बदले नोट का भंडाफोड़ हुआ है, इसने कहा उसी विकीलिक वालों ने तुम्हारी अमरीका वालों से सान्थगांथ की कलई खोल दी है. पब्लिक को ये बात तो समझ में आती है कि ये सारे ही चोर हैं पर यह नहीं समझ में आता कि स्वीकारोक्ति के बावजूद इनको दण्डित कौन करे और कैसे करे. क्या एक के अपराध करने के बाद दुसरे के द्वारा भी वैसा ही अपराध हो तो सब भरपाई हो जाती है. कैसी राजनीतिक पार्टियाँ हैं ये. ये पार्टियाँ हैं या गुंडे मवालियों के हुजूम जो संसद में बैठ कर चखर-चखर एक दुसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहते हैं. कैसी यह जनता है हमारी जो इन बदमाशों को चुन कर भेजती है
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