Monday, 19 September 2011

.

भगतसिंह की साहस का परिचय इस गीत से मिलता है जो उन्‍होने अपने छोटे भाई कुलतार को ३ मार्च को लिखा था-

उसे यह फ़िक्र है हरदम तर्ज़-ए-ज़फ़ा (अन्याय) क्या है
हमें यह शौक है देखें सितम की इंतहा क्या है
दहर (दुनिया) से क्यों ख़फ़ा रहें,
चर्ख (आसमान) से क्यों ग़िला करें
सारा जहां अदु (दुश्मन) सही, आओ मुक़ाबला करें ।

No comments:

Post a Comment