Sunday, 4 September 2011

क्या आप रिश्वत देते या लेते हैं?

अपना काम जल्दी करवाने के लालच में आप पैसे देने से नहीं हिचकिचाते या आप खुद किसी काम को जल्दी करने के लिए ऊपरी आमदनी में विश्वास रखते हैं तो इस प्रश्न के उत्तर के साथ ही आपने अपने देश के सच्चे नागरिक होने का अधिकार खो ‍दिया है। भ्रष्टाचार तमाम बुराइयों की जड़ है। लालच इस भ्रष्टाचार की जननी है। अगर आप किसी भी रूप में इस तरह के काम में शामिल हैं तो देश के लिए कितने ही ऊंचे स्वर में नारे लगा लीजिए सब खोखले हैं। 

आप अगर सचमुच अपने देश को प्यार करते हैं तो इसे भीतर से भी खूबसूरत बनाइए। कर्मों से ऐसे आदर्श रचिए कि भ्रष्टाचार का मूल समाप्त हो सके। एक अकेले अन्ना या किरण बेदी ही क्यों फिक्रमंद हैं देश में लोकपाल बिल लाने के लिए? हम-आप क्यों नहीं नहीं बनते उनकी ताकत? जब हम स्वयं भ्रष्टाचार से दूर होंगे तब ही तो उनका दिल खोलकर साथ दे पाएंगे। 

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